शनिवार, 8 मई 2010
बारुला पंचायत की मांग
फिंगेश्वर। ग्राम पंचायत की बैठक के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्राम के प्रमुखों ने मूलभूत समस्याओं से अवगत कराया तथा प्रेस के माध्यम से ध्यानाकर्षण हेतु दिया जा रहा है। क्योंकि यह पंचायत जिला पंचायत रायपुर अंतिम छोर के साथ वनांचल से घिरा हुआ है जिसके यहां कई तरह की समस्याओं का अंबारहै तथा समाधान हेतु प्रस्तुत है निम्न समस्या है। गोठानपारा में विद्युत पोल में तीन तार आर ट्रांसफार्मर की समस्या। ग्राम पंचायत भवन का निर्माण एवं सोसायटी भवन की समस्या। कांजी हाउस भवन का समस्या। पेयजल हेतु नल जल योजना हेतु पानी टंकी। स्कूल आहता निर्माण एवं उपस्वास्थ्य केन्द्र आहता निर्माण जरूरी है।
बेलर की समस्या
फिंगेश्वर। 29 अप्रैल को बुलंद छत्तीसगढ़ के द्वारा ग्राम पंचायत की बैठक के दौरान पंचायत प्रति निधियों एवं ग्राम के प्रमुखों मूलभूत समस्या से अवगत कराया गया तथा इस प्रेस के माध्यम से ध्यानाकर्षण हेतु दिया जा रहा है। क्योंकि यहां पंचायत जिला रायपुर का अंतिम छोर के साथ वनांचल से घिरा हुआ है। जिसके चलते यहां कई तरह की समस्याओं का अंबार है तथा समस्याओं का समाधान हेतु प्रस्तुत समस्या है। 1. हायर सेकेण्डरी स्कूल का निर्माण। 2. ग्राम पंचायत भवन का निर्माण, 3. हाईस्कूल का अहाता निर्माण, 4. पेयजल का समस्या, 5. उपस्वस्थ केन्द्र भवन को जो लो.नि.वि. बनवाया है। वह गुणवत्ता में कमी के कारणरत रहा है।
मंगलवार, 4 मई 2010
शिक्षा मंत्री के आदेश की धज्जियाँ
शासकीय हाईस्कूल फुण्डहर वर्तमान प्राचार्य के चलते अव्यवस्थाओं एवं भर्राशाही की दल-दल में फंस कर रह गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री के स्पष्ट आदेश के बाद भी यहां के कर्मचारी एवं शिक्षकों को वेतन कभी भी समय में नहीं मिल पा रहा है। माह की प्रत्येक 20-25 तारीख तक वेतन मिलना इस विद्यालय की पहचान बन गया है। प्राचार्य पर शिक्षा मंत्री की इस घोषणा का कोई असर नहीं पड़ा, यहां आज भी वेतन समय से न मिलने का संकट कर्मचारी झेल रहे हैं। इस प्रकार मंत्री एवं उच्च कार्यालयों के आदेशों का पालन न करना प्राचार्य टी.आर. वर्मा की खूबी बन गया है।
ज्ञात हो कि शासकीय हाईस्कूल फुण्डहर में पूरे साल दो शिक्षकों को कार्यालय में बिठाकर वेतन भुगतान किया गया है। इनमें एक व्याख्याता एवं एक शिक्षक को मात्र दो-दो काल पीरियड देकर उन्हें शिक्षाकीय कार्य से पृथक रखा गया है। वही कुछ शिक्षक, व्याख्याताओं को चार-चार पीरियड लगातार देकर अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। इस प्रकार प्राचार्य की भेदभाव पूर्णनीति स्पष्ट प्रतीत होती है। शाला में खुलेआम नियमों की धाियां उड़ाई जा रही है। हाईस्कूल में पदस्थ प्राचार्य टी.आर. वर्मा ने एक व्याख्याता का वेतन छुट्टी स्वीकृत हो जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया है। सूत्रों से पता चला है कि अशोक पाण्डेय व्याख्याता का माह अगस्त से लेकर जनवरी तक पांच माह का वेतन आहरित नहीं किया गया है। चार-पांच माह का वेतन न मिलने से यह व्याख्याता आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। पता चला है कि यहां कार्यरत कुछ अन्य शिक्षक-व्याख्याता के कुछ और भुगतनों को रोककर रखा गया है। प्राचार्य से बार-बार पत्र देकर निवेदन करने के बाद भी वेतन जैसे भुगतनों को रोककर रखा गया है। प्राचार्य का यह कृत्य अपने मातहतों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर अपने फायदे के लिए विद्यालय में वर्षों से जमा राशि को उक्त प्राचार्य ने खाली कर दिया है। इस प्रकार उन्होंने कमीशनखोरी का धंधा चलाकर रखा है।
सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि इस विद्यालय में पढ रहे छात्र-छात्राओं से हजारों रुपए शुल्क के रुप में वसूले गए परन्तु आज तक छात्र-छात्राओं से ली गई राशि की रसीदें उन्हें प्रदान नहीं की गई है। इससे एक बड़े आर्थिक गोल-माल की आशंका से मना नहीं किया जा सकता है। विद्यालय में कितने विद्यार्थी पढ़ रहे है तथा कितने विद्यार्थियों से किस हिसाब से राशि वसूल की गई है इसका विधिवत लेखा जोखा नहीं रखा जा रहा है। आशंका तो यहां तक व्यक्त की जा रही है कि छात्रों से अधिक राशि वसूलकर विद्यालय के खातों में उतनी राशि जमा नहीं की जाती है। यह सब हेरा-फेरी एवं आर्थिक अनियमितता का जीता जागता उदाहरण है।
ज्ञात हो कि शासकीय हाईस्कूल फुण्डहर में पूरे साल दो शिक्षकों को कार्यालय में बिठाकर वेतन भुगतान किया गया है। इनमें एक व्याख्याता एवं एक शिक्षक को मात्र दो-दो काल पीरियड देकर उन्हें शिक्षाकीय कार्य से पृथक रखा गया है। वही कुछ शिक्षक, व्याख्याताओं को चार-चार पीरियड लगातार देकर अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। इस प्रकार प्राचार्य की भेदभाव पूर्णनीति स्पष्ट प्रतीत होती है। शाला में खुलेआम नियमों की धाियां उड़ाई जा रही है। हाईस्कूल में पदस्थ प्राचार्य टी.आर. वर्मा ने एक व्याख्याता का वेतन छुट्टी स्वीकृत हो जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया है। सूत्रों से पता चला है कि अशोक पाण्डेय व्याख्याता का माह अगस्त से लेकर जनवरी तक पांच माह का वेतन आहरित नहीं किया गया है। चार-पांच माह का वेतन न मिलने से यह व्याख्याता आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। पता चला है कि यहां कार्यरत कुछ अन्य शिक्षक-व्याख्याता के कुछ और भुगतनों को रोककर रखा गया है। प्राचार्य से बार-बार पत्र देकर निवेदन करने के बाद भी वेतन जैसे भुगतनों को रोककर रखा गया है। प्राचार्य का यह कृत्य अपने मातहतों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर अपने फायदे के लिए विद्यालय में वर्षों से जमा राशि को उक्त प्राचार्य ने खाली कर दिया है। इस प्रकार उन्होंने कमीशनखोरी का धंधा चलाकर रखा है।
सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि इस विद्यालय में पढ रहे छात्र-छात्राओं से हजारों रुपए शुल्क के रुप में वसूले गए परन्तु आज तक छात्र-छात्राओं से ली गई राशि की रसीदें उन्हें प्रदान नहीं की गई है। इससे एक बड़े आर्थिक गोल-माल की आशंका से मना नहीं किया जा सकता है। विद्यालय में कितने विद्यार्थी पढ़ रहे है तथा कितने विद्यार्थियों से किस हिसाब से राशि वसूल की गई है इसका विधिवत लेखा जोखा नहीं रखा जा रहा है। आशंका तो यहां तक व्यक्त की जा रही है कि छात्रों से अधिक राशि वसूलकर विद्यालय के खातों में उतनी राशि जमा नहीं की जाती है। यह सब हेरा-फेरी एवं आर्थिक अनियमितता का जीता जागता उदाहरण है।
पूर्व सरपंच के द्वारा व्यापक भ्रष्टाचार कार्यवाही का पता नहीं
दुर्ग-कवर्धा डायरी
बेमेतरा। ग्राम पंचायत बांधी के पूर्व सरपंच बिहारीलाल मंडावी के खिलाफ व्यापक भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। इन्होंने जो भ्रष्टाचार किया है उसका एक छोटा सा नमूना प्रस्तुत है पूर्व में अपने कार्यकाल में अंतिम समय में तालाब में मछली पालन का जो ठेका दिया गया था उसे इनके द्वारा पांच वर्षों के लिए पंचराम ध्रुर्वे, दशरु साहू तथा लक्ष्मीकांत को तालाब में मछली पालन का ठेका बगैर किसी ग्रामवासी और पंच को पूछे बगैर दे दिया गया है। ग्राम के कोटवार का कहना है कि आज तक मैंने मत्स्य पालन संबंधित कागज में हस्ताक्षर नहीं किया है। किन्तु विभागीय अधिकारियों द्वारा ग्राम के कोटवार का हस्ताक्षर करा लिया गया है। ग्रामवासियों का कहना है कि इसमें विभागीय अधिकारी व तालाब ठेकेदारों की मिली भगत से सारा खेल खेल गया है। ग्राम सुराज में इन सभी चीजों की फाइल तैयार करके संबंधित लोगों की शिकायत की गई लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते इन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
धर्मनगरी में हो रहा है देह व्यापार
धर्मनगरी कवर्धा यहां मंदिरों की नगरी है वहां देह व्यापार का खुला कारोबार का होना चिंता का विषय है। कवर्धा के ही सतनामी पारा में देह व्यापार का एक बड़ा रैकेट होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ग्राम धमकी व लाखाटोला दो ऐसे गांव है जहां देर व्यापार खुलेआम चल रहा है लेकिन अभी तक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं हुई है तो छोटी-मोटी कार्यवाही करके प्रशासन अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे है।
बेमेतरा। ग्राम पंचायत बांधी के पूर्व सरपंच बिहारीलाल मंडावी के खिलाफ व्यापक भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। इन्होंने जो भ्रष्टाचार किया है उसका एक छोटा सा नमूना प्रस्तुत है पूर्व में अपने कार्यकाल में अंतिम समय में तालाब में मछली पालन का जो ठेका दिया गया था उसे इनके द्वारा पांच वर्षों के लिए पंचराम ध्रुर्वे, दशरु साहू तथा लक्ष्मीकांत को तालाब में मछली पालन का ठेका बगैर किसी ग्रामवासी और पंच को पूछे बगैर दे दिया गया है। ग्राम के कोटवार का कहना है कि आज तक मैंने मत्स्य पालन संबंधित कागज में हस्ताक्षर नहीं किया है। किन्तु विभागीय अधिकारियों द्वारा ग्राम के कोटवार का हस्ताक्षर करा लिया गया है। ग्रामवासियों का कहना है कि इसमें विभागीय अधिकारी व तालाब ठेकेदारों की मिली भगत से सारा खेल खेल गया है। ग्राम सुराज में इन सभी चीजों की फाइल तैयार करके संबंधित लोगों की शिकायत की गई लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते इन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
धर्मनगरी में हो रहा है देह व्यापार
धर्मनगरी कवर्धा यहां मंदिरों की नगरी है वहां देह व्यापार का खुला कारोबार का होना चिंता का विषय है। कवर्धा के ही सतनामी पारा में देह व्यापार का एक बड़ा रैकेट होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ग्राम धमकी व लाखाटोला दो ऐसे गांव है जहां देर व्यापार खुलेआम चल रहा है लेकिन अभी तक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं हुई है तो छोटी-मोटी कार्यवाही करके प्रशासन अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे है।
भ्रष्टाचार रूपी मलाई में डुबे हुए थे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के हाथ
कवर्धा। यू तो भ्रष्टाचार बहुत हुए लेकिन पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के कार्यकाल में एक प्रकार से भ्रष्टाचार की बाढ़ सी आ गई थी। सरकार की हद एक योजना के क्रियान्वयन में इन महोदय ने जमकर भ्रष्टाचार किया इनके पहले के कार्यकाल में भ्रष्टाचार नहीं हुआ ऐसा बात नहीं है लेकिन इनके कार्यकाल में तो भ्रष्टाचार रुपी राक्षस अपना फन फैलाना शुरु कर दिया हर विभाग व हर योजना में क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार खुलकर हुआ है ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में करोड़ों की कमाई इनके द्वारा किया गया राजीव गांधी शिक्षा मिशन की योजना में इन साहब ने चांदी काटा शिक्षा कर्मी, पंचायत कर्मी भर्ती प्रक्रिया में इन साहब के द्वारा लाखों रुपए की राशि का फर्जीवाड़ा सभी के सामने है, पता नहीं इतना घोटाला होने के बाद जनता ने फिर से इनको चुनाव जीता कैसे दिया, इन साहब की सम्पत्ति की यदि जांच की जाए तो ये और इनके रिश्तेदारों और इनके सिपहसलाहकारों के पास करोड़ों रुपए की सम्पत्ति सामने आ सकती है? इन साहब को न जाने किसा वरदहस्त प्राप्त है जो ये इस प्रकार निष्फ्रिक होकर पूरे पांच वर्षों तक भ्रष्टाचार रुपी राक्षस को पैदा करके उन्हें जवानी की दहलीज तक पहुंचाया है इनके द्वारा कराए गए कार्यों की जांच की जाए तो पता चल जाएगा कि इन साहब को किनका वरदहस्त प्राप्त था। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के करीब होने के कारण शायद इन्हाेंने इस प्रकार बेखौफ होकर हर फर्जीवाड़ा किया है और इन साहब को इस भ्रष्टाचार को करने में पूरा संगठन मदद कर रहा था, जिला पंचायत के अधिकारी भी इनके इस कार्य में पूर्ण सहयोग कर रहे थे और अपने तन मन के साथ इनके कार्यों को अंजाम दे रहे थे। जिला पंचायत के इन पूर्व अध्यक्ष के भ्रष्टाचार को ये भोली भाली जनता नहीं समझ पाई और पुन: इनको चुनाव जीता दिया, भोली भाली जनता को विश्वास में लेकर उनके साथ व्यापक रुप से विश्वाघात का नंगा खेल इन साहब के द्वारा खेला गया है। शायद प्रशासन में बैठे आला अधिकारी अंधे हो चुके है जो इन भ्रष्टाचारो की जांच के लिए अभी तक किसी भी प्रकार की कमेटी का गठन नहीं किया गया है या शायद किसी बड़े नेता के दबाव के चलते इन पर प्रशासन भी अपना शिकंजा कसने से डर रही है। मजेदार बात यह है कि पूर्व में जिला पंचायत में भाजपा के अध्यक्ष थे और अब वर्तमान में कांग्रेस के अध्यक्ष है कांग्रेस यदि दबाव डालकर इनके पूर्व के कार्यों की जांच कराए तो सारा मामला प्रकाश में आ सकता है लेकिन यदि जिला पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष को नजराना पेश किया और उस नजराने को उन्होंने स्वीकार कर लिया तो पूरा मामला पूरा दब सकता है? क्योंकि ये तो कलयुग हो यहां कुछ भी हो सकता है। भगवान राम ने पहले ही कह दिया है कि कलयुग में कुछ भी संभव है। फलस्वरुप व्यापक भ्रष्टाचार की जड़ तो पंचायती राज ही है और इनके मेन रोल में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष है जो अभी भी अपना अध्यक्ष की ठाठ बाठ छोड़े नहीं है।
गुरुवार, 29 अप्रैल 2010
सरकार की आंख खोलने में लगे हैं विहिप
सरकार की आंख खोलने में लगे हैं विहिप
शिक्षण व धार्मिक जगहों पर शराब दुकान गलत
गरीबों के लिए सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय सहित विभिन्न सामाजिक कार्यों का बीड़ा उठा रहे विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष रमेश मोदी ने कहा कि वे चिकित्सालय के कार्यक्रम में सरकार के दर्जनभर नेताओं को इसलिए बुला रहे हैं ताकि उनकी आंख खुले कि बगैर सरकारी सहयोग के इतना बड़ा पुण्य का कार्य कैसे हो रहा है। उन्होंने इस बात का भी विरोध किया और कहा कि शिक्षण संस्थाओं और धार्मिक स्थलों के पास शराब दुकानें नहीं खोली जानी चाहिए।
श्री मोदी विश्व हिन्दू परिषद एवं श्री शबरी सेवा संस्थानम् द्वारा संचालित नर्मदादेवी खेतान चिकित्सालय में सुविधा बढ़ाने और साहित्य सदन की स्थापना पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान आर.के. केडिया, किशोर गांधी, डॉ. ओ.पी. अग्रवाल, अशोक मालू भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि आज समाज को दिशा देने की जरूरत है हिन्दुओं को एका के बिना देश का विकास नहीं हो सकता। लेकिन हिन्दू एक नहीं हो पा रहे हैं और जिस दिन जनता एक हो गई सरकार को भी नियमानुसार काम करने पड़ेंगे। श्री मोदी ने कहा कि उनकी संस्था बगैर सरकारी सहयोग के चिकित्सालय में गरीबों के लिए सुविधाएं जुटा रही है और रोज लगभग दो सौ लोग रोज चिकित्सा के लिए आ रहे हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार के इतने लोगों को आंख खोलने बुला रहे हैं ताकि उन्हें भी लगे कि बगैर सरकारी मदद के अच्छा कार्य हो रहा है।
उन्होंने शराब दुकानों को लेकर चल रहे आंदोलन पर कहा कि जनआंदोलन को सरकार को समझना चाहिए और विहिप जनआंदोलन का सम्मान करती है तथा शैक्षणिक व धार्मिक संस्थानों के आसपास शराब दुकानों का विरोध करती है। सरकार में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जहां है वहीं ठीक है नहीं तो या तो वे परेशान रहते या सरकार परेशान होती।
शिक्षण व धार्मिक जगहों पर शराब दुकान गलत
गरीबों के लिए सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय सहित विभिन्न सामाजिक कार्यों का बीड़ा उठा रहे विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष रमेश मोदी ने कहा कि वे चिकित्सालय के कार्यक्रम में सरकार के दर्जनभर नेताओं को इसलिए बुला रहे हैं ताकि उनकी आंख खुले कि बगैर सरकारी सहयोग के इतना बड़ा पुण्य का कार्य कैसे हो रहा है। उन्होंने इस बात का भी विरोध किया और कहा कि शिक्षण संस्थाओं और धार्मिक स्थलों के पास शराब दुकानें नहीं खोली जानी चाहिए।
श्री मोदी विश्व हिन्दू परिषद एवं श्री शबरी सेवा संस्थानम् द्वारा संचालित नर्मदादेवी खेतान चिकित्सालय में सुविधा बढ़ाने और साहित्य सदन की स्थापना पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान आर.के. केडिया, किशोर गांधी, डॉ. ओ.पी. अग्रवाल, अशोक मालू भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि आज समाज को दिशा देने की जरूरत है हिन्दुओं को एका के बिना देश का विकास नहीं हो सकता। लेकिन हिन्दू एक नहीं हो पा रहे हैं और जिस दिन जनता एक हो गई सरकार को भी नियमानुसार काम करने पड़ेंगे। श्री मोदी ने कहा कि उनकी संस्था बगैर सरकारी सहयोग के चिकित्सालय में गरीबों के लिए सुविधाएं जुटा रही है और रोज लगभग दो सौ लोग रोज चिकित्सा के लिए आ रहे हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार के इतने लोगों को आंख खोलने बुला रहे हैं ताकि उन्हें भी लगे कि बगैर सरकारी मदद के अच्छा कार्य हो रहा है।
उन्होंने शराब दुकानों को लेकर चल रहे आंदोलन पर कहा कि जनआंदोलन को सरकार को समझना चाहिए और विहिप जनआंदोलन का सम्मान करती है तथा शैक्षणिक व धार्मिक संस्थानों के आसपास शराब दुकानों का विरोध करती है। सरकार में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जहां है वहीं ठीक है नहीं तो या तो वे परेशान रहते या सरकार परेशान होती।
बुधवार, 28 अप्रैल 2010
पता नहीं बेटा

बेटा- भाजपा सरकार को हिन्दू वादी सरकार माना जाता है।
पिताजी- संघ के कमान से खबर तो यही है।
बेटा- फिर राजधानी में सिर्फ मंदिर ही क्यों तोड़े जा रहे हैं या आवारा पशुओं के नाम पर सिर्फ गाय-बैल ही क्यों पकड़े जा रहे हैं।
पिताजी- पता नहीं बेटा!
------
बेटा- सरकार ने निगम-मंडल में अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया है।
पिताजी- हां बेटा खबर तो नई सरकार के गठन के दिन से ही सुन रहे हैं।
बेटा- क्या निगम-मंडल अध्यक्ष के रहते भ्रष्टाचार में बढाेत्तरी नहीं होती।पिताजी- पता नहीं बेटा!
पिताजी- संघ के कमान से खबर तो यही है।
बेटा- फिर राजधानी में सिर्फ मंदिर ही क्यों तोड़े जा रहे हैं या आवारा पशुओं के नाम पर सिर्फ गाय-बैल ही क्यों पकड़े जा रहे हैं।
पिताजी- पता नहीं बेटा!
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बेटा- सरकार ने निगम-मंडल में अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया है।
पिताजी- हां बेटा खबर तो नई सरकार के गठन के दिन से ही सुन रहे हैं।
बेटा- क्या निगम-मंडल अध्यक्ष के रहते भ्रष्टाचार में बढाेत्तरी नहीं होती।पिताजी- पता नहीं बेटा!
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