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शनिवार, 8 मई 2010

अवैध शराब से डुण्डेरावासी त्रस्त

डोंगरगढ। समीपस्थ ग्राम टुण्डेरा में अवैध शराब बिक्री से गांव की शांति भंग हो रही है। अवैध शराब बेचने वालों द्वारा खुलेआम गुण्डागर्दी की जा रही है और पुलिस भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं करती जिससे कभी भी गंभीर घटना हो सकती है।

बजाज डिस्कवर माइलेज कान्टेस्ट सम्पन्न

नवापारा-राजिम। विगत दिनों ए.जी. आटो केयर द्वारा पर्यावरण अनुकूल वाहन प्रतियोगिता के अंतर्गत बजाज डिस्कवर माइलेज कान्टेस्ट का आयोजन किया गया। जिसमें नगर एवं आसपास के अंचल के लोगों ने काफी उत्साह से भाग लिया। जिसमें लगभग पचपन प्रतियोगियों ने नवापारा से हसदा तक बजाज डिस्कवर का चालन किया। जिसमें बेस्ट माइलेज एवं पर्यावरण अनुकूल वाहन चालकों में क्रमश: प्रथम नवापार के ढालचंद साहू का एवरेज 119 कि.मी. पीआईएल का एवं द्वितीय नरेन्द्र साहू चिपरीडीह का एवरेज 114 कि.मी. पीआईएल तृतीय कैलाश टाण्डे कौंदकेरा का एवरेज 111 कि.मी. रहा। इसके साथ ही प्रदूषण मुक्त नगर को हमारा के संदेश के साथ सभी बजाज वाहनों नि:शुल्क जांच एवं सलाह दी गई जिससे नगर के लोगों मे उत्साह व वातावरण देखा गया।

ग्राम बोरसी की समस्या

फिंगेश्वर। ग्राम बोरसी के सरपंच ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि गांव में वैसे तो पेयजल की समस्या है। वहीं गलियों का कांक्रीटीकरण और यहां के पढ़े लिखे युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग मंत्री से की गई है।

धमनी पंचायत की मांग

फिंगेश्वर। धमनी ग्राम पंचायत की सरपंच चन्द्रकला गोयल ने राय शासन से ग्राम पंचायत के विकास की मांग की है। सरपंच ने कहा कि कांक्रीटीकरण, तालाबों का पचरीकरण, पुलिया निर्माण, मुक्तिधाम, डामरीकरण व ग्राम पंचायत भवन की मांग ग्राम सुराज से की गई है।

बारुला पंचायत की मांग

फिंगेश्वर। ग्राम पंचायत की बैठक के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्राम के प्रमुखों ने मूलभूत समस्याओं से अवगत कराया तथा प्रेस के माध्यम से ध्यानाकर्षण हेतु दिया जा रहा है। क्योंकि यह पंचायत जिला पंचायत रायपुर अंतिम छोर के साथ वनांचल से घिरा हुआ है जिसके यहां कई तरह की समस्याओं का अंबारहै तथा समाधान हेतु प्रस्तुत है निम्न समस्या है। गोठानपारा में विद्युत पोल में तीन तार आर ट्रांसफार्मर की समस्या। ग्राम पंचायत भवन का निर्माण एवं सोसायटी भवन की समस्या। कांजी हाउस भवन का समस्या। पेयजल हेतु नल जल योजना हेतु पानी टंकी। स्कूल आहता निर्माण एवं उपस्वास्थ्य केन्द्र आहता निर्माण जरूरी है।

बेलर की समस्या

फिंगेश्वर। 29 अप्रैल को बुलंद छत्तीसगढ़ के द्वारा ग्राम पंचायत की बैठक के दौरान पंचायत प्रति निधियों एवं ग्राम के प्रमुखों मूलभूत समस्या से अवगत कराया गया तथा इस प्रेस के माध्यम से ध्यानाकर्षण हेतु दिया जा रहा है। क्योंकि यहां पंचायत जिला रायपुर का अंतिम छोर के साथ वनांचल से घिरा हुआ है। जिसके चलते यहां कई तरह की समस्याओं का अंबार है तथा समस्याओं का समाधान हेतु प्रस्तुत समस्या है। 1. हायर सेकेण्डरी स्कूल का निर्माण। 2. ग्राम पंचायत भवन का निर्माण, 3. हाईस्कूल का अहाता निर्माण, 4. पेयजल का समस्या, 5. उपस्वस्थ केन्द्र भवन को जो लो.नि.वि. बनवाया है। वह गुणवत्ता में कमी के कारणरत रहा है।

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

लेकिन डा रमन कोई नई मुसीबत लेने के पक्ष में नहीं...


विधायक रवि त्रिपाठी की असामयकि निधन के बाद रिक्त हुई भटगांव विधानसभा की सीट से चुनाव लड़ने आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने कमर कस लिया है लेकिन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह नई मुसीबत लेने के पक्ष में नहीं है और वे श्री साय को रायसभा में भेजने की तैयारी में है। इसे लेकर भाजपा की अंदरूनी राजनीति में जबरदस्त उफान के संकेत हैं।
छत्तीसगढ क़े प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी के हाथों पटखनी के बाद से राय की राजनीति में लौटने के लिए छटपटा रहे वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय इन दिनों बेहद सक्रिय हो गए हैं और भटगांव उपचुनाव लड़ने तगड़ी रणनीति बना रहे हैं। अपने समर्थकों को आगे करने के अलावा वे स्वयं वरिष्ठ भाजपाईयों से मुलाकात कर अपनी ईच्छा जता रहे हैं। बताया जाता है कि जोगी शासनकाल में नेता प्रतिपक्ष रहे नंदकुमार साय को मुख्यमंत्री का प्रबल दावेदार माना जाता है और ऐसे में उनके भटगांव उपचुनाव लड़ने की ईच्छा से पार्टी में जबरदस्त तूफान खड़ा कर दिया है और कहा जाता है कि उनका चुनाव लड़कर जीतना पहले ही आदिवासी एक्सप्रेस से जूझ रहे डा. रमन सिंह के लिए नई मुसीबतें ला सकती है। यही वजह है कि वे डा. रमन विरोधी भी सक्रिय हो गए हैं और वे श्री साय को भटगांव उपचुनाव के लिए तैयार करने लगे हैं।
दूसरी तरफ इस खबर ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और उनके समर्थकों की नींद उड़ा दी है और वे सामान्य सीट से किसी आदिवासी को टिकट देने का अभी से विरोध कर रहे हैं और श्री साय को रायसभा में ही भेजने की कोशिश की जा रही है। इधर भाजपा सूत्रों का कहना है कि लगातार चुनाव जीतने की वजह से डा. रमन सिंह का कद बढ़ा है ऐसे में डा. सिंह ही टिकिट तय करेंगे और वे नहीं चाहेंगे कि श्री साय को टिकिट मिले। हालांकि यह बात कहने वाले यह भी कहते हैं कि श्री साय के नाम की अनदेखी आसान नहीं है। बहरहाल एक तरफ जहां श्री साय को चुनाव लड़ाने कुछ मंत्री भी सक्रिय हैं वही दूसरी तरफ उन्हें रोकने सामान्य सीट का रोढ़ा भी लगाया जा रहा है।

गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

दो-ढाई साल में ही ढह गया महुदा का स्कूल

पाटन। छत्तीसगढ़ में इन दिनों लूट खसोट किस तरह मचा हुआ है इसका ताजा उदाहरण महुदा पंचायत के स्कूल का है जो दो-ढाई साल में ही स्कूल की दीवार ढह गई। इस मामले में पूर्व सरपंच उर्मिला जीवन साहू पर कार्रवाई की मांग गांव वालों ने की है।
दरअसल शासन में बैठे मंत्रियों और अफसरों के संरक्षण में जबरदस्त भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। बताया जाता है कि महुदा पंचायत में सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2008 में स्कूल निर्माण का काम शुरु किया गया और सरकार ने राशि भी स्वीकृत की लेकिन अभी तक स्कूल बना नहीं है और अधूरा निर्माण ढहना शुरु हो गया है। इस मामले में बताया जाता है कि स्कूल के लिए आई राशि खत्म हो गया है और अधूरे निर्माण में भी जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। दीवार गिरने की घटना के बाद से यहां बच्चों और उनके अभिभावकों में चिंता व्यप्त है। इसलिए प्रधान पाठक ने इस घटना की खबर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को लिखित में दी है।

निगम-मंडलों के गठन में देरी से नेता हलाकान

एक पद पर दस-दस दावेदार, सत्ता-संगठन दोनों परेशान
तपेश जैन
रायपुर। पद एक है और दावेदार दस तो संतुलन कैसे स्थापित हो? पद बंट गया तो कई मुंह फुल जाएंगे और कूल होने की कोई वजह बाकी रह पाएंगी। अभी तो कारण है सो कई मुद्दों पर नाराजगी के बाद भी नेताओं को कूल रहने की समझाईश दी जाती है और इसका पालन भी होता है। ये आंखों की शर्म का कम और सत्ता सुख का लालच ही यादा है कि सरकार की कमजोरियों और अफसरों की दादागिरी पर कतिपय नेता चुप्पी साधे हुए है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह को भी ये मालूम है कि राजनीति के इस पैतंरे से ही वे निपकंटक राज कर सकते हैं। जो लोग आज उनके आगे पीछे रहे है पद नहीं मिलने पर पीठ पीछे गरियाने से भी नहीं चूकेंगे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने अपनी दूसरी पारी में सवा साल बाद तक निगम मंडलों में कोई नियुक्ति नहीं की है। इसके चलते पार्टी के कई नेता हलाकान है कि आखिर इसमें विलंब क्यों किया जा रहा है।
यह बताना लाजमी होगा कि सन् 2008 दिसंबर में दूसरी बार मुख्यमंत्री चुने गए डा. रमन सिंह ने यह संकेत दिया था कि सन् 2009 मई में लोकसभा चुनाव के बाद निगम-मंडलों में नियुक्ति कर दी जाएगी। लेकिन राजनैतिक उठा पटक के चलते ऐसा ना हो सका। फिर यह चर्चा्र प्रकाश में आई कि नवम्बर 2009 में नगर निगम, पालिका चुनाव के बाद गठन हो जाएगा। इसके बाद पंचायत चुनाव 2010 जनवरी तक मामला टल गया। अब सभी इलेक्शन के बाद संगठन के पुर्नगठन ने मनोयन की सूची को रोक रखा है। इसी माह के अंत तक नए प्रदेशाध्यक्ष का नाम घोषित होने के बाद प्रदेश कार्यकारिणी का भी गठन होना है। अटकलें है कि यह मई माह तक खिंच सकता है। यानी निगम मंडलों के उम्मीदवारों को तब तक इंतजार करना पड़ सकता है।
राजनीति अटकलों, चर्चाओं और संभवनाओं से ही चलती है। सो किसकी नियुक्ति होगी और किसकी नहीं इस पर चर्चा करें तो विधानसभा चुनाव 2008 में जिन 17 विधायकों को पार्टी ने दुबारा टिकट नहीं दी उसमें से दो लोग बेहद सक्रिय है। पहला नाम है पूनम चंद्राकर का तो दूसरा विनोद खांडेकर का। श्री चंद्राकर महासमुंद जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते है और विधानसभा चुनाव में इस जिले में भाजपा का सुपड़ा साफ हो गया है। सो सत्ता संतुलन के लिहाज से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सरकार में होना ही चाहिए। लेकिन राजनीति तो राजनीति है इसलिए श्री चंद्राकर के विरोधी डा. विमल चोपड़ा फिर अडंगा लगा सकते है। दूसरी ओर श्री खांडेकर दलित बौध्दमार्गी है जिनकी बड़ी संख्या छत्तीसगढ़ में है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी कई लोग जुड़े है। संघ का दबाव श्री खांडेकर को कुर्सी तक पहुंचा सकता है। दोनों पूर्व विधायकों के अतिरिक्त पराजित नेता अजय चंद्राकर भी व्यवस्थापन चाहते है लेकिन उन्हें संगठन में महामंत्री बनाने की यादा संभावनाएं है। पूर्व निगम मंडलों के पदाधिकारियों की आस है कि उन्हें फिर से सत्ता कुंजी मिले। इसमें सुभाष राव और श्याम बैस को सफलता मिल सकती है। रायपुर शहर अध्यक्ष पद पर रतन डागा की नियुक्ति हुई तो आरडीए अध्यक्ष राजीव अग्रवाल बनेगें नहीं तो श्री डागा को उपाध्यक्ष बना सकते है। मंत्री पद के लिए ब्राम्हण वर्ग के बद्रीधर दीवान को हरी झंडी मिल सकती है। उन्हें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मिल सकता है तो विधानसभा उपाध्यक्ष पद कांग्रेस को समर्पित कर डा. रमन सिंह लोकतंत्र की स्वस्थ परपंरा पुन: कायम कर सकते है। बहरहाल क्या होगा, कब होगा यह कहा नहीं जा सकता क्योंकि राजनीति में सबकुछ अनिश्चित होता है। कब कौन बदल जाए कहा नहीं जा सकता, इसलिए पॉलिटिक्स को भाग्य का खेल माना जाता है।

बुधवार, 14 अप्रैल 2010

देवांगनों की दहाड़

नेताम को हटाना ही पड़ेगा
छत्तीसगढ़ के पंचायत मंत्री रामविचार नेताम की मुसिबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है और अब देवांगन समाज ने आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। समाज के अध्यक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह बेवजह समय खराब कर रहे हैं। उन्हें समाज को हटाना ही पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि पंचायत मंत्री रामविचार नेताम पर संतोष देवांगन नामक अधिकारी को थप्पड़ मारने का आरोप है और यह मामला धीरे-धीरे ही सही तूल पकड़ता जा रहा है। वैसे तो इस मामले में राय सरकार ने जांच अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं लेकिन समाज एक सूत्रीय कार्रवाई चाहता है।
20 मार्च 2010 को यह घटना बिलासपुर के एसईसीए गेस्ट हाउस में घटित हुई। इस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह भी उसी शहर में थे। घटना के दो दिनों बाद 22 मार्च को प्रदेश देवांगन समाज की ओर से एक ज्ञापन मुख्यमंत्री रमन सिंह को विधानसभा परिसर पहुंच कर सौंपा गया। इस दौरान उन्होंने देवांगन समाज के पदाधिकारियों को यह आश्वासन दिया था कि जो भी उचित होगा देखेंगे। लेकिन अभी तक उक्त मंत्री श्री नेताम के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदेश देवांगन समाज के पदाधिकारी 26 मार्च 2010 को महामहिम रायपाल शेखर दत्त से मिले। उन्होंने भी इस घटना की जानकारी विस्तार से ली और यह आश्वासन दिया कि वे आवश्यक कार्रवाई के लिए शासन-प्रशासन को लिखेंगे। देवांगन समाज के पदाधिकारी उक्त घटना को लेकर लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मंत्री श्री नेताम को तत्काल मंत्री पद से बर्खास्त किया जाए। लेकिन शासन की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि प्रदेश देवांगन समाज की ओर से यह चेतावनी दी गई थी कि 2 अप्रैल तक कार्रवाई नहीं होने पर 3 अप्रैल को सामाजिक बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
प्रदेश देवांगन समाज के अध्यक्ष रामगोपाल देवांगन एवं जिला देवांगन समाज के सचिव मेघनाथ देवांगन ने बताया कि 3 अप्रैल को प्रदेश देवांगन समाज के पदाधिकारियों की एक बैठक टिकरापारा रायपुर स्थित देवांगन समाज के भवन में रखी गई थी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 12 अप्रैल 2010 को प्रदेश देवांगन समाज के नेतृत्व में छ.ग. के सभी जिले के देवांगन समाज के पदाधिकारी एक दिवसीय सांकेतिक रैली निकाल कर धरना प्रदर्शन करेंगे। इस आंदोलन के माध्यम से देवांगन समाज यह मांग करेगी कि ऐसे मंत्री जो अपने ओहदे एवं कानून का ज्ञान नहीं रख सकते उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाए। सांकेतिक आंदोलन के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश देवांगन समाज आगे क्रमबध्द आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
जांच अधिकारी पर आरोप
देवांगन समाज ने जांच अधिकारी सोनमणि वोरा की जांच से संतुष्ट नहीं है उनका कहना है कि श्री वोरा कभी श्री नेताम के अधिनस्थ रहे हैं ऐसे में उनकी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
नेताम पहले भी
हाथ उठा चुके हैं...
देवांगन समाज ने यह भी कहा कि पंचायत मंत्री श्री नेताम पहले भी शासकीय अधिकारियों व कर्मचारियों से मारपीट कर चुके हैं और गृहमंत्री बनने के बाद मामले का खात्मा किया गया

मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

अल्ट्राटेक का नया खेल

फूट डालो, राज करो
हिरमी स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र के कारनामें से आसपास के लोग बेहद आक्रोशित हैं और सरकार ने गांव वालों की बजाय अल्ट्राटेक का ध्यान रखने से स्थिति विस्फोटक होते जा रही है। यदि वहीं गांव वालों को ठेका देकर गांव को आपस में बांटने की कोशिश से गांव में तनाव की स्थिति बन रही है।
बताया जाता है कि सरकार व प्रशासन में बैठे अफसरों की बेरुखी से गांव वाले बेहद नाराज है और वे शीघ्र ही बड़े आंदोलन का मन बना रहे हैं। हिरमी स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र प्रबंधन द्वारा स्टेट बैंक से स्टाफ कालोनी तक किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण से आम लोगों को परेशानी हो रही है। शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल से करीब 30 मीटर दूर सड़क के दूसरे किनारे पर पावर प्लांट स्थित हैं। हिरमी व कुथरौद गांवों के लिए बनाए गए सीसी रोड के सोल्डिंग नहीं भरे जाने, स्टाफ कालोनी के बाहर सड़क के किनारे संयंत्र द्वारा डाले जा रहे कचरे के ढेर से उड़ने वाली धूल से हिरमी व कुथरौद के ग्रामीण आक्रोशित है। वही निस्तारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप भी लगा रहे हैं। हिरमी सरपंच प्यारेलाल ध्रुव व कुथरौद सरपंच चंद्रवली मोहन वर्मा, डा. एए फारुखी, कमलेश जायसवाल, केके साहू, संजय धुरंधर अन्य ग्रामीणों ने कहा कि प्रबंधन द्वारा सड़क चौड़ीकरण के नाम पर आधा किमी लंबा और 15 से 20 फीट चौड़ा ग्राम की निस्तारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है जो अनुचित है। कुथरौद सरपंच श्रीमती वर्मा ने 15 जुलाई 1997 को संयंत्र के अधिकारी और तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुए समझौते की प्रतिलिपि दिखाते हुए कहा कि गेट नंबर दो के पास स्थित निस्तारी भूमि के बदले वर्तमान में संयंत्र ने अतिक्रमित भूमि को निस्तारी के लिए छोड़ा है।
हिरमी के सरपंच श्री ध्रुव ने संयंत्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम वासियों को लड़ाने के उद्देश्य से ही गांव के लोगों को ठेका दिया गया है। हायर सेकेण्डरी स्कूल के छात्र-छात्राओं व शिक्षकों ने कुछ माह पावर प्लांट के शोर-शराबे को पढ़ाई में बाधा बताया है। शिक्षकों ने बच्चे के ध्वनि प्रदूषण से मानसिक रोगी होने की आशंका जताई है। ग्रामीणों ने बताया कि संयंत्र द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसे बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डा. फारुखी ने संयंत्र की रेलवे क्रासिंग के संकरी ढलान को खतरनाक ढलान बताते हुए कहा कि इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी है। पूर्व में इसके खिलाफ सकलोर के पूर्व सरपंच के नेतृत्व में रेलवे क्रासिंग पर धरना प्रदर्शन किया गया लेकिन नतीजा सिफर रहा।