मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

अल्ट्राटेक का नया खेल

फूट डालो, राज करो
हिरमी स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र के कारनामें से आसपास के लोग बेहद आक्रोशित हैं और सरकार ने गांव वालों की बजाय अल्ट्राटेक का ध्यान रखने से स्थिति विस्फोटक होते जा रही है। यदि वहीं गांव वालों को ठेका देकर गांव को आपस में बांटने की कोशिश से गांव में तनाव की स्थिति बन रही है।
बताया जाता है कि सरकार व प्रशासन में बैठे अफसरों की बेरुखी से गांव वाले बेहद नाराज है और वे शीघ्र ही बड़े आंदोलन का मन बना रहे हैं। हिरमी स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र प्रबंधन द्वारा स्टेट बैंक से स्टाफ कालोनी तक किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण से आम लोगों को परेशानी हो रही है। शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल से करीब 30 मीटर दूर सड़क के दूसरे किनारे पर पावर प्लांट स्थित हैं। हिरमी व कुथरौद गांवों के लिए बनाए गए सीसी रोड के सोल्डिंग नहीं भरे जाने, स्टाफ कालोनी के बाहर सड़क के किनारे संयंत्र द्वारा डाले जा रहे कचरे के ढेर से उड़ने वाली धूल से हिरमी व कुथरौद के ग्रामीण आक्रोशित है। वही निस्तारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप भी लगा रहे हैं। हिरमी सरपंच प्यारेलाल ध्रुव व कुथरौद सरपंच चंद्रवली मोहन वर्मा, डा. एए फारुखी, कमलेश जायसवाल, केके साहू, संजय धुरंधर अन्य ग्रामीणों ने कहा कि प्रबंधन द्वारा सड़क चौड़ीकरण के नाम पर आधा किमी लंबा और 15 से 20 फीट चौड़ा ग्राम की निस्तारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है जो अनुचित है। कुथरौद सरपंच श्रीमती वर्मा ने 15 जुलाई 1997 को संयंत्र के अधिकारी और तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुए समझौते की प्रतिलिपि दिखाते हुए कहा कि गेट नंबर दो के पास स्थित निस्तारी भूमि के बदले वर्तमान में संयंत्र ने अतिक्रमित भूमि को निस्तारी के लिए छोड़ा है।
हिरमी के सरपंच श्री ध्रुव ने संयंत्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम वासियों को लड़ाने के उद्देश्य से ही गांव के लोगों को ठेका दिया गया है। हायर सेकेण्डरी स्कूल के छात्र-छात्राओं व शिक्षकों ने कुछ माह पावर प्लांट के शोर-शराबे को पढ़ाई में बाधा बताया है। शिक्षकों ने बच्चे के ध्वनि प्रदूषण से मानसिक रोगी होने की आशंका जताई है। ग्रामीणों ने बताया कि संयंत्र द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसे बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डा. फारुखी ने संयंत्र की रेलवे क्रासिंग के संकरी ढलान को खतरनाक ढलान बताते हुए कहा कि इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी है। पूर्व में इसके खिलाफ सकलोर के पूर्व सरपंच के नेतृत्व में रेलवे क्रासिंग पर धरना प्रदर्शन किया गया लेकिन नतीजा सिफर रहा।

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