शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

लेकिन डा रमन कोई नई मुसीबत लेने के पक्ष में नहीं...


विधायक रवि त्रिपाठी की असामयकि निधन के बाद रिक्त हुई भटगांव विधानसभा की सीट से चुनाव लड़ने आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने कमर कस लिया है लेकिन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह नई मुसीबत लेने के पक्ष में नहीं है और वे श्री साय को रायसभा में भेजने की तैयारी में है। इसे लेकर भाजपा की अंदरूनी राजनीति में जबरदस्त उफान के संकेत हैं।
छत्तीसगढ क़े प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी के हाथों पटखनी के बाद से राय की राजनीति में लौटने के लिए छटपटा रहे वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय इन दिनों बेहद सक्रिय हो गए हैं और भटगांव उपचुनाव लड़ने तगड़ी रणनीति बना रहे हैं। अपने समर्थकों को आगे करने के अलावा वे स्वयं वरिष्ठ भाजपाईयों से मुलाकात कर अपनी ईच्छा जता रहे हैं। बताया जाता है कि जोगी शासनकाल में नेता प्रतिपक्ष रहे नंदकुमार साय को मुख्यमंत्री का प्रबल दावेदार माना जाता है और ऐसे में उनके भटगांव उपचुनाव लड़ने की ईच्छा से पार्टी में जबरदस्त तूफान खड़ा कर दिया है और कहा जाता है कि उनका चुनाव लड़कर जीतना पहले ही आदिवासी एक्सप्रेस से जूझ रहे डा. रमन सिंह के लिए नई मुसीबतें ला सकती है। यही वजह है कि वे डा. रमन विरोधी भी सक्रिय हो गए हैं और वे श्री साय को भटगांव उपचुनाव के लिए तैयार करने लगे हैं।
दूसरी तरफ इस खबर ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और उनके समर्थकों की नींद उड़ा दी है और वे सामान्य सीट से किसी आदिवासी को टिकट देने का अभी से विरोध कर रहे हैं और श्री साय को रायसभा में ही भेजने की कोशिश की जा रही है। इधर भाजपा सूत्रों का कहना है कि लगातार चुनाव जीतने की वजह से डा. रमन सिंह का कद बढ़ा है ऐसे में डा. सिंह ही टिकिट तय करेंगे और वे नहीं चाहेंगे कि श्री साय को टिकिट मिले। हालांकि यह बात कहने वाले यह भी कहते हैं कि श्री साय के नाम की अनदेखी आसान नहीं है। बहरहाल एक तरफ जहां श्री साय को चुनाव लड़ाने कुछ मंत्री भी सक्रिय हैं वही दूसरी तरफ उन्हें रोकने सामान्य सीट का रोढ़ा भी लगाया जा रहा है।

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