तपेश जैन
रायपुर। प्रदेशव्यापी ग्राम सुराज अभियान के तहत मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की शिकायत की गई है। गांव-गांव में शासकीय कर्मी आय, निवास प्रमाण पत्रों के लिए रुपए की मांग करते है। राशन कार्डों के लिए घूस मांगी जाती है। राशन माफिया फर्जी कार्डों के जरिए सस्ते अनाज की हेराफेरी कर रहे है तो योजनाओं का लाभ देने में भी भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। डा. रमन सिंह ने कांकेर के सेलेगांव में ग्रामीणों की शिकायत पर ऐसे भ्रष्ट करतूतों वाले कर्मचारियों को सस्पेंड करने का ऐलान किया है। इस घोषणा पर अगर एक प्रतिशत भी अमल किया गया तो प्रदेश की जनता बेहद राहत महसूस करेगी।
गौरतलब है कि शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार के मामलों में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है। हर विभाग में करप्शन के मामले है। सबसे यादा शिक्षा विभाग में गड़बड़ियां हो रही है। पिछले दो महिनों में इस विभाग में किताब खरीदी उपकरण खरीदी, नियुक्ति सहित कई मामलों में भारी अनियमितता के मामले उजागर हुए है। मंत्री और सचिव के बीच खींचतान मची हुई है। सचिव से जुड़े कतिपय लोगों ने मंत्री पर भारी भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति का सनसनीखेज आरोप समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाया है। इस आरोप की शिकायत नई दिल्ली तक की गई है। वहीं सचिव नंदकुमार के खिलाफ लोक आयोग ने कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इन सबके अलावा पांच करोड़ 83 लाख रुपए की खरीदी में भारी हेराफेरी का मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। नया मामला सूचना शक्ति योजना के तहत बालिकाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण के नाम पर हो रही गड़बड़ी का है। जिन स्कूलों में छुट्टियां हो गई है और जहां बिजली नहीं है वहां भी कंप्यूटर प्रशिक्षण के नाम पर निजी एजेंसी को ठेका दे दिया गया है। पिछले पांच साल में 60 करोड़ रुपए से भी यादा का भुगतान इस मद में किया गया है जबकि इस विषय में ढेरों शिकायतें की जा रही है। शिक्षा सचिव नंद कुमार सबको सस्पेंड करने का ऐलान करते है लेकिन कब करेगें भगवान ही जानें।
छत्तीसगढ़ में बढता भ्रष्टाचार सरकार के लिए चुनौती बन गया है। बड़े-बड़े मामलों के अलावा छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी रुपए की मांग कर्मी अधिकारियों द्वारा की जाती है। बिना घूस के डा. रमन सिंह भी अपना आय और निवासी प्रमाण पत्र नहीं बनवा पाएंगे। विधायक एवं मंत्रियों तक की सिफारिशें रद्दी की टोकरी में डाल दी जाती है। एसडीए श्री देवांगन और मंत्री श्री नेताम के प्रकरण ने प्रदेश में व्याप्त अफसरशाही की पोल खोल दी है। ऐसे समय में अगर मुख्यमंत्री ने अपनी घोषणा पर एक प्रतिशत भी अमल किया तो प्रदेश में हालात सुधर जाएंगे।
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